नमस्कार दोस्तों मेरा नाम अमित गौतम है मैं आपके लिए एक इंटरनेट से संबंधित Article लिख रहा हूं मैं आपको डिटेल में बताऊंगा कि इंटरनेट कैसे काम करता है और इंटरनेट को आप तक पहुंचाने का एक सर्विस प्रोवाइडर को कितना खर्चा उठाना पड़ता है आप सोचते होंगे कि इंटरनेट को देने वाली कंपनी का बहुत भारी भरकम खर्चा करना पड़ता होगा परंतु दोस्तों मैं आपको बताना चाहता हूं कि ऐसा कुछ भी नहीं है आपको यह जानकर हैरानी होगी  इंटरनेट प्रोवाइडर का आपको इंटरनेट सर्विस प्रदान करने का कितना शुल्क उठाना पड़ता है

1. Internet kya hai 
इंटरनेट क्या है अगर मैं आपको किताब के  language में
बताओ तो  इंटरनेट एक नेटवर्क है  जो एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर से जुड़ा हुआ है आपने आज तक की यही किताबों में पढ़ा और लोगों से सुना है परंतु आज आपको पता चलेगा इंटरनेट की उत्पत्ति कैसे हुई और यह पूरे संसार में कैसे फैल गया और इस को कौन ऑपरेट करता है इंटरनेट को पूरी दुनिया से कैसे जोड़ा गया है आपके दिमाग में यह सवाल कभी तो कभी जरूर आया होगा इसका आसान भाषा में उत्तर है समुद्री मार्ग से इंटरनेट को पूरी दुनिया तक पहुंचाने के लिए पूरे समुद्र में पानी में ऑप्टिकल फाइबर बिछाई गई है और यह ऑप्टिकल फाइबर टियर वन कंपनी ने बिछाई है आपके दिमाग में एक सवाल होगा कि अगर इनमें से कोई ऑप्टिकल फाइबर बीच से टूट जाए या उसमें कोई  खराबी आ जाए तब तक पूरी दुनिया में इंटरनेट का नेटवर्क टूट जाएगा परंतु ऐसा नहीं है टियर वन कंपनी ने इसके लिए बहुत से बैकअप ऑप्टिकल फाइबर बिछाई हुई है और समय-समय पर सभी टिकल फाइबर का निरीक्षण किया जाता है अगर किसी भी ऑप्टिकल फाइबर में कोई खराबी आ जाती है तो इंटरनेट को दूसरे ऑप्टिकल फाइबर की मदद से Automatically connect किया जाता है क्योंकि यह कार्य सॉफ्टवेयर  की मदद से कंप्यूटर सही कमांड देकर उसको सही किया जाता है समुद्री मार्ग से ही इंटरनेट से पूरे दुनिया को जोड़ा गया समुद्री मार्ग ऑप्टिकल फाइबर बिछा दी गई है टियर वन कंपनी ही सभी देशों को इंटरनेट की सर्विस प्रोवाइड करती हैं टियर वन का खर्चा केवल ऑप्टिकल फाइबर केबल को बचाने के लिए ही आया था और अगर इस में कोई खराबी आ जाती है तो उसकी मेंटेनेंस के लिए इसका खर्चा आता है आपको यह जानकर हैरानी होगी इंटरनेट ऐसे सबके लिए फ्री है परंतु सर्विस प्रोवाइडर भी एक बार ऑप्टिकल फाइबर बिछा देते हैं और उसके बाद उनका खर्चा टावर मेंटेनेंस और ऑप्टिकल फाइबर मेंटेनेंस का ही रहता है बाकी उनको इंटरनेट फ्री में इंडिया में provide किया जाता tear1 बहुत ही कम चार्ज में इंटरनेट को दूसरे देशों को दे देती है जो समुद्री रास्ते से उस देश तक नेटवर्क पहुंचता है उसका पैसा वहां की गवर्नमेंट tearवन कंपनी को देती है और उसके बाद बात आती है टेलीकॉम सेक्टर की जब हमारी समुद्री सीमा तक इंटरनेट पहुंच जाता है उसके बाद इंटरनेट को लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेवारी टेलीकॉम सेक्टर की होती है उदाहरण के लिए जिओ आइडिया एयरटेल यह इस समय इंडिया के प्रमुख टेलीकॉम ऑपरेटर हैं और इंटरनेट को पूरे देश में पहुंचाने की जिम्मेवारी टेलीकॉम सेक्टर की होती है टेलीकॉम सेक्टर अब जहां तक समुद्र में तीर वन कंपनी ने अपनी ऑप्टिकल फाइबर को सेट किया होता है उससे आगे ऑप्टिकल फाइबर देश में बिछाने की जिम्मेवारी टेलीकॉम ऑपरेटर के आ जाती है और इन टेलीकॉम सेक्टर को केवल इंटरनेट के लिए अपनी इन्वेस्टमेंट ऑप्टिकल फाइबर बिछाने और इनको मेंटेनेंस करने का ही खर्च आता है और इसके अलावा इनको इंटरनेट का कोई भी चार्ज नहीं देना होता है तो आसान भाषा में कहें तो इंटरनेट पर एक बार यह इन्वेस्ट करके इनको केवल मेंटेनेंस कहीं पैसा लगता है तभी तो भारत में जिओ कंपनी ने एक बार इन्वेस्ट करके जो कि उनका ऑप्टिकल फाइबर बिछाने का पैसा लगा था उसकी मदद से उन्होंने शुरू शुरू में पूरे भारत में इंटरनेट फ्री में दिया था क्योंकि उन्होंने सबसे पहले भारत में 4G के ऑप्टिकल फाइबर बिछा दी थी उसके बाद उन्होंने अपना कस्टमर बेस बनाया कंपनी अच्छी तरह से जानती थी कि अगर उनको पास कस्टमर base बन गया तो बाद में बहुत पैसा कमा सकते हैं क्योंकि उन्होंने ऑप्टिकल फाइबर बिछा दी थी तो उनका आगे मेंटेनेंस पर ही थोड़ी बहुत पूंजी लगनी थी तो पहले उन्होंने फ्री में इंटरनेट देकर अपना सब्सक्राइबर बेस बनाया और उसके बाद उन्होंने इसकी मदद से बहुत profit earn कर रहे हैं अब इनको केवल मेंटेनेंस का ही चार्ज देना पड़ता है इन्होंने अपने इन्वेस्टमेंट से tear1 कंपनी की तरह अपनी ऑप्टिकल फाइबर एरिया और यूरोप तक बिछा दी है जिससे और देशों से बी उन Country तक ऑप्टिकल फाइबर बिछाकर वहां की सरकार से चार्ज लेती है इंडिया में ऑप्टिकल फाइबर  चेन्नई और मुंबई के समुद्री मार्ग से इंटरनेट सुविधा प्राप्त करती है आप समझ ही गए होंगे इंटरनेट का कंपनी को कोई शुल्क नहीं देना होता है बस वह इन्वेस्टमेंट करती है और अब कि कल फाइबर बिछाते हैं और जिसकी मदद से इंटरनेट को हर जगह पहुंच आती है ऑप्टिकल फाइबर टावर से कनेक्ट होती है और हर टावर की इंटरनेट प्रोवाइड करने की capacity होती है उदाहरण के तौर पर एक इंटरनेट ki क्षमता 100 जीबी पर डे है अगर वहां पर इंटरनेट उपभोक्ता सो होंगे तो वहां के इंटरनेट स्पीड कम होती है अगर उसी जगह पर ट्राफिक कम होगा तो आपको इंटरनेट की स्पीड फास्ट मिलेगी तभी तो आजकल जिओ की स्पीड कम होती है क्योंकि उसका कस्टमर बेस बहुत ज्यादा है जिससे उसका इंटरनेट कभी-कभी slow काम करने लगता है
मैं आपको एक और उदाहरण देता हूं आपने महसूस किया होगा की शाम के समय इंटरनेट की स्पीड बहुत कम होती है और 12:00 बजे के बाद रात को इंटरनेट की स्पीड बहुत ज्यादा होती है यह ट्रैफिक के कारण ही होता है टेलीकॉम सेक्टर को अपडेट रहने की बहुत जरूरत होती है अगर वह update नहीं होगा तो बहुत पीछे छूट जाएंगे उदाहरण के लिए idea-vodafone क्योंकि इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को लेटेस्ट टेक्नोलॉजी पर काम करना पड़ता है idea-vodafone इस रेस में तभी पीछे रही क्योंकि जिओनी 4G टेक्नोलॉजी सबसे पहले लिया है और उसके बाद एयरटेल ने 4जी पर काम किया इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के लिए भी यह एक चुनौती होती है कि वह अपने नेटवर्क को अपग्रेड करें अगर ऐसा नहीं करते हैं तो आप बहुत पीछे छूट जाते हैं अब जिस कंपनी ने 5G टेक्नोलॉजी को सबसे पहले लांच करेगी वह इंडिया में टेलीकॉम सेक्टर राज करेगी 5Gटेक्नोलॉजी के लिए उन्हें न्यू ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के के लिए भी इन्वेस्टमेंट करना पड़ता है आप समझ ही गए होंगे की कितने भी संसार में devices है और कहीं ना कहीं एक दूसरे से जुड़ी होती है और इन्हें जोड़ने का काम ऑप्टिकल फाइबर करती है समुद्र में ने tear1 कंपनी द्वारा गाया गया है उसके बाद इंटरनेट को समुद्र से किसी देश में लाने का कार्य वहां की टेलीकॉम कंपनियां करती है और ऑप्टिकल फाइबर बचाकर टावर से कनेक्ट करती है और टावर प्रोक्सी ऐड्रेस आपके फोन से कनेक्ट हो जाते हैं और ऐसे ही यह नेटवर्क एक जगह से दूसरी जगह ऑप्टिकल फाइबर की मदद से पहुंचाया जाता है अगर आपको मेरा आर्टिकल पसंद आया तो आप मेरे ब्लॉग को ऐसी ही knolwdege के आर्टिकल पढ़ने के लिए मेरे ब्लॉक को सब्सक्राइब कर सकते हैं अगर आपको इस से रिलेटेड कोई भी सवाल है तो आप कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं

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